Showing posts with label Kumar Ravindra. Show all posts
Showing posts with label Kumar Ravindra. Show all posts

Tuesday, August 11, 2009

Bakson Mein Yaadein - Kumar Ravindra

बक्सों में यादें

बक्सों में बन्द हैं यादें
       हर कपड़ा एक याद है
       जिसे तुम्हारे हाथों ने तह किया था
धोबी ने धोते समय इन को रगड़ा था
       पीटा था
मैल कट गया पर ये न कटीं
यह और अन्दर चली गयीं
हम ने निर्मम होकर इन्हें उतार दिया
       इन्होंने कुछ नहीं कहा
पर हर बार
       ये हमारा कुछ अंश ले गयीं
             जिसे हम जान न सके
त्वचा से इन का जो सम्बन्ध है वह रक्त तक है
       रक्त का सारा उबाल इन्होंने सहा है
इन्हें खोल कर देखो
       इन में हमारे खून की खुशबू ज़रूर होगी
अभी ये मौन है
       पर इन की एक-एक परत में जो मन छिपा है
             वह हमारे जाने के बाद बोलेगा
यादें आदमी के बीत जाने के बाद ही बोलती हैं
बक्सों में बन्द रहने दो इन्हें
       जब पूरी फुरसत हो तब देखना
इन का वार्तालाप बड़ा ईर्ष्यालू है
       कुछ और नहीं करने देगा।

- कुमार रवीन्द्र


My Blog List